वेंटिलेटर पर जीवन और मौत से जूझ रही तीन माह की मासूम को मिला नया जीवन
डॉ. उल्हास पाटील अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञों की टीम ने बचाई शिशु की जान

जलगांव | प्रतिनिधि

अमलनेर की मात्र तीन माह की एक गंभीर रूप से बीमार बालिका को डॉ. उल्हास पाटील मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सफल उपचार देकर नया जीवन प्रदान किया है। वेंटिलेटर पर भर्ती इस मासूम बच्ची को लगातार दस दिनों तक गहन चिकित्सा देने के बाद स्वस्थ किया गया। वर्तमान में उसकी स्थिति पूरी तरह खतरे से बाहर बताई जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमलनेर निवासी मोनीस हारून शेख की तीन माह की पुत्री को पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार आ रहा था। इसके साथ ही उसे बार-बार दौरे (झटके) आने लगे थे। बच्ची की हालत लगातार बिगड़ने पर परिजनों ने उसे तत्काल धुले के एक अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे कृत्रिम श्वसन यंत्र (वेंटिलेटर) पर रखा गया।

हालांकि उपचार के बावजूद उसकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था। अधिक उन्नत चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता को देखते हुए बच्ची को हायर सेंटर के रूप में प्रसिद्ध डॉ. उल्हास पाटील अस्पताल, जलगांव में रेफर किया गया।

अस्पताल में भर्ती होते ही एनआईसीयू और पीआईसीयू विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. सुयोग तन्नीरवार तथा डॉ. उमाकांत अणेकर ने बच्ची की विस्तृत जांच शुरू की। चिकित्सकों ने रीढ़ की हड्डी के तरल पदार्थ (सीएसएफ) की जांच, मस्तिष्क का एमआरआई तथा विभिन्न रक्त परीक्षण किए। जांच रिपोर्ट के आधार पर बच्ची को ‘एन्सेफलाइटिस’ (मस्तिष्क में सूजन) जैसी गंभीर बीमारी होने का पता चला।

रोग की पुष्टि होते ही विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में डॉ. ओमश्री गुडे, डॉ. कुशल धांडे, डॉ. विशाल कोठावडे, डॉ. नवेद खान, डॉ. मिमोनी कुंभारे, डॉ. सृष्टि भिरूड, डॉ. अस्मिता गायकवाड, डॉ. निशिगंधा सोनवणे तथा डॉ. भारती झोपे की टीम ने तत्काल उपचार पद्धति में आवश्यक बदलाव करते हुए विशेष दवाओं की मात्रा बढ़ाई।

बाल रोग विशेषज्ञों, आईसीयू चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों ने लगातार बच्ची की निगरानी करते हुए उपचार जारी रखा। इलाज का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा और धीरे-धीरे उसकी स्थिति में सुधार होने लगा। दस दिनों की अथक मेहनत के बाद चिकित्सकों ने बच्ची को वेंटिलेटर से बाहर निकाला और अंततः उसकी जान बचाने में सफलता हासिल की।

विशेष बात यह रही कि बच्ची का पूरा उपचार महात्मा फुले जनआरोग्य योजना के अंतर्गत निःशुल्क किया गया, जिससे परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

चिकित्सकों ने दी महत्वपूर्ण सलाह

डॉ. उल्हास पाटील अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नवेद खान ने बताया कि बच्ची अस्पताल में अत्यंत गंभीर अवस्था में भर्ती हुई थी। उसे तेज बुखार, दौरे और श्वसन संबंधी समस्याएं थीं। आवश्यक जांचों के बाद एन्सेफलाइटिस की पुष्टि हुई और तत्काल उपचार शुरू किया गया। एनआईसीयू एवं पीआईसीयू टीम के समन्वित प्रयासों से बच्ची की हालत में सुधार आया और उसे नया जीवन मिल सका।

उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि छोटे बच्चों में बुखार के साथ झटके, अत्यधिक सुस्ती या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि समय पर उपचार मिलने से गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

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