कविवर्य ना. धों. महानोर साहित्य, कृषि-पानी पुरस्कार समारोह संपन्न भवरलाल एंड कांताबाई जैन फाउंडेशन तथा यशवंतराव चव्हाण सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य और कृषि-पानी क्षेत्र के पुरस्कार प्रदान जलगांव/मुंबई | प्रतिनिधि कविवर्य ना. धों. महानोर के साहित्यिक और सामाजिक विचारों की विरासत को आगे बढ़ाने वाला कविवर्य ना. धों. महानोर पुरस्कार वितरण समारोह 2026 मुंबई में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। भवरलाल एंड कांताबाई जैन फाउंडेशन तथा यशवंतराव चव्हाण सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में साहित्य और कृषि-पानी क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पुरस्कारार्थियों को सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर परिवर्तन जलगांव द्वारा निर्मित ‘हंस अकेला’ सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें संत कबीर के विचारों और सामाजिक संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में सांसद सुप्रिया सुले, जैन इरिगेशन के सह-प्रबंध निदेशक अतुल जैन, वरिष्ठ साहित्यकार रंगनाथ पठारे, डॉ. श्रीकांत देशमुख, सुधींद्र कुलकर्णी तथा ना. धों. महानोर के परिवारजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन दत्ता बालसराफ ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत राज्यगीत से हुई। इनका हुआ सम्मान समारोह में साहित्य तथा कृषि-पानी प्रबंधन क्षेत्र के पुरस्कार प्रदान किए गए। साहित्य क्षेत्र में अविनाश उषा वसंत, मुंबई, श्रीकांत साव, चंद्रपुर, प्रेषित प्रदीप सिद्धभट्टी तथा विठ्ठल खिलारी, सातारा को सम्मानित किया गया। वहीं कृषि-पानी प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए वैशाली पाटील, दसनूर, तहसील रावेर, जिला जलगांव तथा सीमा क्षीरसागर, कडवंची, तहसील जालना का गौरव किया गया। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार रंगनाथ पठारे ने साहित्य, पठन और वैचारिक प्रगल्भता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान प्राप्त करने के लिए पढ़ना आवश्यक है। लेखक के व्यक्तित्व में प्रगल्भता निर्माण करने के लिए पठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और ज्ञान के प्रत्येक क्षेत्र में इसकी आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान जीवन की कठिन परिस्थितियों पर मात देकर अन्य महिलाओं के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं के कार्यों पर आधारित एक वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। इसे देखकर उपस्थितों की आंखें नम हो गईं। डॉ. श्रीकांत देशमुख ने कहा कि लेखकों और शोधकर्ताओं को अपने लेखन एवं शोध के माध्यम से वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन करते हुए ठोस सामाजिक भूमिका प्रस्तुत करनी चाहिए। कबीर के विचारों का प्रभावी प्रस्तुतीकरण परिवर्तन जलगांव के कलाकारों ने ‘हंस अकेला’ कार्यक्रम के माध्यम से संत कबीर के जीवन, विचारों और सामाजिक संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। ‘पद घुंघट के पट खोल रे’, भक्ति परंपरा की ताकत और वारकरी परंपरा, ‘शून्य गढ़ सर बस्ती कौन सोता कौन जागे है’, नाथ परंपरा, ‘सुनता है गुरु ज्ञानी’, संत नामदेव की पंढरपुर से घुमान यात्रा, ‘घट घट में पंछी’ और ‘कोई नहीं अपना समझना’ सहित विभिन्न दोहों एवं प्रस्तुतियों के माध्यम से कबीर के विचारों को दर्शकों तक पहुंचाया गया। गोविंद मोकाशी, पांडुरंग पाटील, श्रद्धा कुलकर्णी, वरुण नेवे, अंजली धुमाळ, रोहित बोरसे, यश महाजन, सुनीला भोलाने, अक्षय नेहे, हर्षल पाटील सहित परिवर्तन के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। शंभू पाटील ने विवेचन किया। साहित्य, कृषि, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम प्रस्तुत करने वाला यह पुरस्कार समारोह तथा ‘हंस अकेला’ कार्यक्रम उपस्थितों के लिए यादगार बन गया। Post navigation जलगांव में बारिश के लिए भगवान झूलेलाल की आराधना; 12 सितंबर को निकलेगी भव्य बहराणा साहेब शोभायात्रा सफाई कर्मचारियों के विभिन्न मुद्दों पर मंगलवार को जिला परिषद में समीक्षा बैठक