जैन हिल्स में “फ्रूटफुल इंडिया” परियोजना की राष्ट्रीय अनुसंधान अनुदान नियोजन कार्यशाला संपन्न जलगांव, 18 जून (प्रतिनिधि) : देश के गरीब, आदिवासी और निम्न आय वर्ग के परिवारों को पौष्टिक फलों की उपलब्धता अधिक सुलभ एवं किफायती बनाने के उद्देश्य से संचालित महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय “फ्रूटफुल इंडिया” परियोजना की तीन दिवसीय नियोजन कार्यशाला का आयोजन जैन हिल्स स्थित परिश्रम सभागार में किया गया। 16 जून को प्रारंभ हुई इस कार्यशाला का समापन 18 जून को हुआ। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने व्यापक विचार-विमर्श कर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। कार्यशाला का उद्घाटन जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड के सह-प्रबंध निदेशक अजित जैन के हाथों हुआ। इस अवसर पर बागवानी विभाग के पूर्व उपमहानिदेशक तथा सीएचएआई (CHAI) के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. एच. पी. सिंह, अलायंस ऑफ बायोडायवर्सिटी इंटरनेशनल एंड सीआईएटी के वैश्विक कार्यक्रम प्रमुख डॉ. क्रिस केटल, भारत प्रतिनिधि डॉ. जे. सी. राणा, तकनीकी सलाहकार डॉ. प्रेम माथुर, डॉ. अनिल ढाके, डॉ. के. बी. पाटील, डॉ. बी. के. सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित थे। इस अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्था का मुख्यालय इटली के रोम शहर में स्थित है। कार्यशाला में देश के दस राज्यों की भागीदार संस्थाओं, आईसीएआर (ICAR) की अनुसंधान संस्थाओं, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा स्वयंसेवी संगठनों से जुड़े लगभग 40 वैज्ञानिक, शोधकर्ता और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हुए। इस अवसर पर वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रेम माथुर ने कहा कि भारत ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन पोषण सुरक्षा आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कुपोषण का प्रभाव गरीब, आदिवासी और वंचित वर्गों पर अधिक पड़ता है। इसलिए स्थानीय और पारंपरिक पौष्टिक फल प्रजातियों के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। अमेरिका स्थित समाजसेवी डॉ. उमेश माहेश्वरी के आर्थिक सहयोग से इस परियोजना को संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आंवला, जामुन, अमरूद, सीताफल, फालसा, बेर, करौंदा, लीची, नींबू तथा संतरा-मौसंबी जैसे पौष्टिक फलों की खेती और उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए कम पानी में उगने वाली, कम लागत वाली तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में टिकाऊ फल फसलों की पहचान और उनके प्रसार पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही वर्षभर पौष्टिक फलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। देश के लघु एवं सीमांत किसानों को अक्सर अप्रमाणित स्रोतों से निम्न गुणवत्ता वाले पौधे खरीदने के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए रोग एवं कीट मुक्त, उच्च गुणवत्ता वाली तथा शीघ्र फल देने वाली पौध सामग्री उपलब्ध कराना इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, सरकारी एजेंसियों तथा निजी क्षेत्र के सहयोग से प्रमाणित पौध सामग्री की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। यह परियोजना अगले पांच से छह वर्षों में विभिन्न राज्यों में लागू की जाएगी। कार्यशाला के दूसरे दिन वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने जैन इरिगेशन की अनुसंधान एवं उत्पादन सुविधाओं का दौरा किया। उन्होंने केले, अनार, आम और अन्य फल फसलों के लिए उपयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक टिश्यू कल्चर तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन प्रणाली तथा आधुनिक कृषि तकनीकों का अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने लाखों किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराकर उत्पादन और आय बढ़ाने में जैन इरिगेशन के योगदान की सराहना की। कार्यशाला में परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीतियों, किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने, जलवायु-प्रतिरोधी फल फसलों के प्रसार तथा वंचित समुदायों में पोषण सुरक्षा को मजबूत करने जैसे विषयों पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल देश में सतत कृषि, पोषण सुधार और किसान कल्याण को नई दिशा प्रदान करेगी। समापन समारोह में सहभागी संस्थाओं ने गरीब एवं वंचित समुदायों को पौष्टिक फल उपलब्ध कराने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए उदार आर्थिक सहयोग देने पर डॉ. उमेश माहेश्वरी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जैन इरिगेशन के सह-प्रबंध निदेशक अजित जैन ने कहा कि “फ्रूटफुल इंडिया” पहल के अंतर्गत देशभर के किसानों को आम, मौसंबी, संतरा, अनार, स्ट्रॉबेरी, अमरूद, नारियल और पपीता जैसी उच्च गुणवत्ता वाली फल फसलों के पौधे तथा ड्रिप सिंचाई तकनीक उपलब्ध कराई जा सकती है। सीएफआई और बायोडायवर्सिटी इंटरनेशनल के सहयोग से जैन हिल्स में किसानों का प्रशिक्षण भी आयोजित किया जा सकता है। गुणवत्तापूर्ण और आनुवंशिक रूप से शुद्ध पौध सामग्री मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में फल उत्पादन बढ़ेगा, पोषण सुरक्षा मजबूत होगी और स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली के बागवानी विभाग के पूर्व उपमहानिदेशक डॉ. एच. पी. सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री उपलब्ध कराने में जैन इरिगेशन को व्यापक अनुभव है। केले के टिश्यू कल्चर पौधों से लेकर स्वीट ऑरेंज, स्ट्रॉबेरी और आम जैसी फसलों की प्राइमरी एवं सेकेंडरी हार्डनिंग की उन्नत तकनीक उनके पास उपलब्ध है। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराने में उनकी विशेषज्ञता इस परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। Post navigation जैन हिल्स में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का विशेष कार्यक्रम विकसित भारत रोजगार योजना’ के अंतर्गत 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित