देवस्थान भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव का महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने किया कड़ा विरोध

राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी, सरकार से प्रस्ताव तत्काल वापस लेने की मांग
अमलनेर | प्रतिनिधि

महाराष्ट्र सरकार द्वारा देवस्थान इनाम एवं मंदिरों की भूमि को वहिवाटदारों (कब्जाधारकों) के नाम हस्तांतरित करने के लिए प्रस्तावित कानून का महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने तीव्र विरोध किया है। इस संबंध में महासंघ की अमलनेर शाखा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सांसद स्मिताताई वाघ, पूर्व मंत्री एवं विधायक अनिलदादा पाटील तथा उपविभागीय अधिकारी मयूर भंगाळे को ज्ञापन सौंपकर प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
महासंघ का आरोप है कि प्रस्तावित कानून हिंदू देवस्थानों के अस्तित्व पर संकट खड़ा करने वाला है तथा यह भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने की साजिश है। महासंघ के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार देवस्थान की भूमि को वहिवाटदारों में बांटने का अधिकार किसी को भी नहीं है।

देवस्थान भूमि को मिले विशेष संरक्षण
महासंघ ने मांग की है कि देवस्थान भूमि के सातबारा (भूमि अभिलेख) पर “देवस्थान प्रतिबंधित सत्ता प्रकार” की विशेष नोंद दर्ज करने संबंधी परिपत्र जारी किया जाए। साथ ही वक्फ बोर्ड की तर्ज पर मंदिरों और देवस्थान संपत्तियों को भी कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए।
भूमि हड़पने वालों पर सख्त कानून की मांग
ज्ञापन में गुजरात की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी एंटी लैंड ग्रैबिंग कानून लागू करने की मांग की गई है। महासंघ ने सुझाव दिया है कि देवस्थान भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ 14 वर्ष के सश्रम कारावास और गैर-जमानती अपराध की व्यवस्था की जाए।
इसके अलावा पिछले 25 वर्षों में देवस्थान भूमि के हस्तांतरण तथा कथित फर्जी भूमि अभिलेखों की जांच के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की भी मांग की गई है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की मांग
महासंघ ने देवस्थान भूमि से जुड़े न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित कर छह माह के भीतर मामलों का निपटारा करने की मांग की है।

आंदोलन की चेतावनी

महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया तो राज्यभर में व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।
इस ज्ञापन पर संतश्री प्रसाद महाराज, मंगळग्रह सेवा संस्था के अध्यक्ष डॉ. डिंगबर महाले, सचिव सुरेश बाविस्कर, सुभाष पाटील, नाना निळे, पवन लांडगे, ज्ञानेश्वर पाटील, संजय पाटील सहित अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।

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