टीम झूलेलाल न्यूज़ जलगांव : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग में ईंधन बचत का एक अभिनव और पर्यावरण-अनुकूल प्रयोग चर्चा का विषय बना हुआ है। खान्देश एज्युकेशन सोसायटी के एम. जे. कॉलेज में चल रहे 21 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में सैकड़ों स्वयंसेवकों के भोजन की व्यवस्था के लिए एलपीजी गैस के बजाय विशेष प्रकार के चूल्हे का उपयोग किया जा रहा है। इस पहल से ईंधन खर्च में बड़ी बचत हो रही है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रशिक्षण वर्ग में लगभग 700 से 800 स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं के लिए दिन में दो समय भोजन तैयार किया जाता है। सामान्य रूप से इतने बड़े स्तर पर खाना बनाने के लिए प्रतिदिन दो बड़े एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता पड़ती, जिससे लगभग 6 हजार रुपये तक का खर्च आता। लेकिन संघ के प्रबंधकों ने इसका किफायती और वैकल्पिक समाधान खोजते हुए धुले के स्वयंसेवक राहुल कुलकर्णी द्वारा तैयार किए गए विशेष चूल्हे का उपयोग शुरू किया। इस चूल्हे में एलपीजी की जगह कपास, तुअर की लकड़ी (तूरखाटी) और गाय के गोबर से तैयार किए गए ‘वुड ब्लॉक्स’ को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। खास बात यह है कि इस चूल्हे से धुआं नहीं निकलता और कम खर्च में बड़ी मात्रा में भोजन तैयार किया जा सकता है। जहां पहले प्रतिदिन हजारों रुपये खर्च होते थे, वहीं अब लगभग 300 रुपये में खाना तैयार होने की जानकारी सामने आई है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रय होसबळे ने भी इस प्रयोग की सराहना की। उन्होंने स्वयं चूल्हे का निरीक्षण कर भविष्य में देशभर के संघ प्रशिक्षण वर्गों में इस प्रकार के प्रयोग को अपनाने का सुझाव दिया। पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और स्वदेशी तकनीक का संगम माना जा रहा यह प्रयोग ग्रामीण क्षेत्रों, सामूहिक कार्यक्रमों और सामाजिक गतिविधियों के लिए प्रेरणादायक बन रहा है। कम खर्च में प्रभावी प्रबंधन का यह मॉडल अब अन्य संस्थाओं के लिए भी उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। Post navigation जलगाँव ज़िले में ग्राम सेवकों द्वारा लिए गए अवैध यात्रा भत्ते की वसूली के आदेश जारी RTI कार्यकर्ता और समाज सेवक भगवान चौधरी की लगातार कोशिशों को मिली सफलता पेट्रोल डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध; नागरिक अफवाहों पर विश्वास न करें जिलाधिकारी की अपील