टीम झूलेलाल न्यूज़ जलगांव : जलगांव/नाशिक: जलगांव जिले में कई वर्षों तक पुलिस सेवा में रहकर स्थानीय अपराध शाखा में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के रूप में उल्लेखनीय कार्य करने वाले सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी किसनराव नजन पाटील ने अब खेती के क्षेत्र में एक अनोखा और चर्चित प्रयोग सफल कर दिखाया है। उन्होंने नाशिक जिले के घोटी स्थित अपने खेत में जापान की बेहद महंगी और दुर्लभ मानी जाने वाली ‘मियाजाकी’ आम की खेती शुरू की है, जिसमें इस वर्ष पहली बार फल आए हैं।

पुलिस विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान साहसी कार्रवाई और अनुशासनप्रिय अधिकारी के रूप में पहचान बनाने वाले किसनराव पाटील करीब डेढ़ वर्ष पहले सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद आरामदायक जीवन चुनने के बजाय उन्होंने आधुनिक और प्रयोगशील खेती का रास्ता अपनाया। अपने खेत में विभिन्न किस्मों के कलमी आम लगाने के साथ उन्होंने दक्षिण भारत से जापान के प्रसिद्ध ‘मियाजाकी’ आम के तीन पौधे मंगवाकर रोपित किए।

पहली बार पेड़ों पर आए फल

सावधानीपूर्वक देखभाल, मौसम के अनुसार प्रबंधन और उचित खाद-पानी की व्यवस्था के चलते इस वर्ष पहली बार इन पेड़ों पर बौर आया और फल लगने शुरू हुए। वर्तमान में तीन पेड़ों पर कुल 22 आम लगे हैं, जो आने वाले दिनों में पूरी तरह पक जाएंगे। महाराष्ट्र में मियाजाकी आम की खेती बेहद कम किसानों द्वारा की जाती है, इसलिए यह प्रयोग क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

‘एग ऑफ सन’ के नाम से मशहूर

मियाजाकी आम मूल रूप से जापान का एक प्रीमियम आम माना जाता है। इसका लाल-गहरा बैंगनी रंग और चमकदार स्वरूप इसकी खास पहचान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसे ‘एग ऑफ सन’ नाम से जाना जाता है। इसकी मिठास, सुगंध और पोषण गुणों के कारण दुनिया भर में इसकी मांग काफी अधिक है।

लाखों रुपये किलो तक पहुंचती है कीमत

मियाजाकी आम की कीमत सुनकर आम लोग भी हैरान रह जाते हैं। बाजार में इसकी कीमत करीब ढाई से तीन लाख रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है। देश में बहुत कम किसानों ने इसकी खेती की है। मध्यप्रदेश के जबलपुर क्षेत्र में एक किसान द्वारा इन आमों की सुरक्षा के लिए शिकारी कुत्ते और सशस्त्र सुरक्षा तैनात करने की खबर भी काफी चर्चा में रही थी।

खेती में प्रयोगशीलता का बना उदाहरण

सेवानिवृत्ति के बाद नई राह चुनते हुए किसनराव नजन पाटील ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक और प्रयोगशील सोच के जरिए खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है। उनका यह प्रयास किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है कि पारंपरिक खेती के साथ उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर बढ़कर आर्थिक रूप से मजबूत हुआ जा सकता है।

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