कवयित्री बहिणाबाई चौधरी की अर्धप्रतिमा का अनावरण गणमान्य अतिथियों के हाथों संपन्न

बहिणाबाई के जीवनचरित्र पर शोध, कृषि तथा विशेष रूप से केले के अनुसंधान से जुड़े उपक्रमों को शासन की ओर से हरसंभव सहायता दी जाएगी – पालकमंत्री गुलाबराव पाटील

जलगांव, 5 जुलाई : कवयित्री बहिणाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय में कवयित्री बहिणाबाई चौधरी की अर्धप्रतिमा का अनावरण तथा ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भवन में अत्याधुनिक सुसज्जित सभागार का उद्घाटन राज्य के जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री तथा जलगांव जिले के पालकमंत्री गुलाबराव पाटील के हाथों रविवार, 5 जुलाई को प्रातः 11.30 बजे संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय एल. माहेश्वरी ने की।

इस अवसर पर राज्य के वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे, विश्वविद्यालय सलाहकार समिति के अध्यक्ष अशोक जैन, महापौर दीपमाला काले, विधायक सुरेश भोले, जिलाधिकारी रोहन घुगे, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी करिश्मा नायर, अधीक्षक अभियंता प्रशांत सोनवणे, प्र-कुलगुरु प्रो. एस. टी. इंगळे, प्रबंधन परिषद सदस्य राजेंद्र नन्नवरे, नितीन झाल्टे, एड. अमोल पाटील, प्रो. सुरेखा पालवे, प्रो. पवित्रा पाटील, अधिष्ठाता प्रो. जगदीश पाटील, कुलसचिव डॉ. विनोद पाटील, वित्त एवं लेखा अधिकारी रवींद्र पाटील, अधिसभा सदस्य विष्णु भंगाळे तथा सामाजिक कार्यकर्ता किशोर चौधरी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

अपने उद्घाटन भाषण में पालकमंत्री गुलाबराव पाटील ने कहा कि कवयित्री बहिणाबाई चौधरी का जीवन और साहित्य पूरे समाज को दिशा देने वाला है तथा विश्वविद्यालय में स्थापित यह अर्धप्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि बहिणाबाई का दर्शन स्वयं एक विश्वविद्यालय के समान है और महाराष्ट्र के विभिन्न भागों से शिक्षा के लिए आने वाले विद्यार्थियों को उनके जीवन संघर्ष और विचारों से निरंतर प्रेरणा मिलती रहेगी। इस अवसर पर उन्होंने बहिणाबाई की प्रसिद्ध कविता “माझी माय सरस्वती माले शिकवते बोली” का उल्लेख करते हुए मातृभाषा, शिक्षा और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने विश्वविद्यालय में ‘बालासाहेब ठाकरे सेंटर फॉर एक्सलेंस’ की स्थापना के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराने में सहयोग का आश्वासन दिया तथा छात्रावास भवन को विश्वविद्यालय को हस्तांतरित करने के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से कार्रवाई करने की बात कही। साथ ही उन्होंने बहिणाबाई के जीवनचरित्र पर शोध, कृषि तथा विशेष रूप से केले के अनुसंधान से जुड़े उपक्रमों को शासन की ओर से हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

राज्य के वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित बहिणाबाई की प्रतिमा विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्थल बनेगी। उन्होंने कहा कि खानदेशी भाषा अत्यंत समृद्ध है और इसके प्रति किसी प्रकार का हीनभाव रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने खानदेश की विभिन्न बोलियों पर शोध और उनके संरक्षण की अपेक्षा व्यक्त की।

विश्वविद्यालय सलाहकार समिति के अध्यक्ष अशोक जैन ने कहा कि बहिणाबाई के साहित्य का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के लिए जैन इरिगेशन के बहिणाबाई ट्रस्ट और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बहिणाबाई की कविताओं को अधिक से अधिक भाषाओं में पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

जिलाधिकारी रोहन घुगे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बहिणाबाई का जीवन इस बात का संदेश देता है कि प्रतिभा के सामने सामाजिक अथवा शैक्षणिक सीमाएं बाधा नहीं बन सकतीं। उन्होंने कहा कि अहिराणी और लेवा जैसी स्थानीय बोलियों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक के माध्यम से अहिराणी भाषा के अनुवाद की सुविधा विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता किशोर चौधरी ने कहा कि बहिणाबाई की कविताओं को उनकी मूल बोली में ही संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि उनके साहित्य के आधुनिकीकरण के दौरान उसकी मौलिकता और भाषाई सौंदर्य अक्षुण्ण रखा जाए।

अध्यक्षीय समापन भाषण में कुलगुरु प्रो. वी. एल. माहेश्वरी ने बहिणाबाई की अर्धप्रतिमा के लिए जिला नियोजन समिति के माध्यम से निधि उपलब्ध कराने में पहल करने हेतु पालकमंत्री गुलाबराव पाटील तथा समिति के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बहिणाबाई की कविताएं जीवनानुभवों से जन्मी हैं और डिजिटल तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भी उनका जीवनदर्शन विद्यार्थियों को मूल्याधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।

इस अवसर पर ‘केला निर्यात प्रबंधन’ प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम की जानकारी पुस्तिका का विमोचन किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय के साइलेज परियोजना के अंतर्गत विकसित ‘साइलेज नाइट्रो बैक’ और ‘साइलेज ब्ल्यूटी’ उत्पादों की जानकारी पुस्तिकाओं का भी विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय और आईआईटी चेन्नई के बीच हुए समझौते के तहत विश्वविद्यालय तथा संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रशिक्षण अभियान का शुभारंभ भी किया गया।

समारोह में बहिणाबाई चौधरी अर्धप्रतिमा संबंधी विश्वविद्यालय स्तरीय समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों का सम्मान किया गया। इनमें समिति के अध्यक्ष राजेंद्र नन्नवरे, प्रो. व. पू. होले, किशोर चौधरी, आर्किटेक्ट नितीन पारगांवकर, मूर्तिकार दीपक थोपटे, यशवंत गरुड और अभियंता राहुल पाटील शामिल थे। इसके अलावा ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भवन के सभागार निर्माण से जुड़े अभियंता एस. आर. पाटील, आर्किटेक्ट योगेंद्र गुजराथी, अभियंता बी. डी. पाटील, अभियंता सुनील नेमाडे, ठेकेदार राकेश पाटील और अमर कासट का भी सम्मान किया गया।

कार्यक्रम का प्रस्ताविक भाषण प्र-कुलगुरु प्रो. एस. टी. इंगळे ने किया। संचालन खेमराज पाटील और प्रो. वीणा महाजन ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. विनोद पाटील ने किया। इस समारोह में विश्वविद्यालय के अधिसभा सदस्य दीपक पाटील, नितीन ठाकूर, केदारनाथ कवडीवाले, प्रो. एच. एम. पाटील सहित अन्य अधिसदस्य, विद्या परिषद एवं विभिन्न प्राधिकरणों के सदस्य, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी, शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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