मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण
पीआईटी-एनडीपीएस कानून की धाराओं पर विस्तृत मार्गदर्शन; जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कार्यशाला आयोजित

जलगांव : जिले में बढ़ते मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा संबंधित कानूनों की विभिन्न धाराओं की जानकारी पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जलगांव में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में केंद्रीय जांच एजेंसियों से प्रशिक्षण प्राप्त धुले जिले के सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) निलेश मोरे ने अधिकारियों को विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।

जांच प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर

कार्यशाला के दौरान मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधानों, जांच पद्धतियों, साक्ष्य संकलन, आरोप-पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया तथा न्यायालयीन कार्यवाही पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। एनडीपीएस मामलों की जांच में होने वाली त्रुटियों से बचने और दोषियों को सजा सुनिश्चित करने के उपायों पर विशेष बल दिया गया।

पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम की विस्तृत जानकारी

कार्यशाला का मुख्य विषय पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम, 1988 (Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) रहा। एपीआई निलेश मोरे ने बताया कि इस कानून का उद्देश्य मादक पदार्थों और मनोप्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार को रोकना तथा समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के भविष्य में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल होने की आशंका हो, तो इस अधिनियम के तहत उसे निवारक निरोध (Preventive Detention) में रखा जा सकता है। यह कानून अपराध होने के बाद सजा देने के लिए नहीं, बल्कि संभावित अपराधों को रोकने के लिए बनाया गया है।

निवारक निरोध संबंधी प्रावधानों की जानकारी

कार्यशाला में केंद्र सरकार, राज्य सरकार अथवा अधिकृत अधिकारियों को प्राप्त निवारक निरोध के अधिकार, निरोध की अवधि, सलाहकार बोर्ड की भूमिका तथा संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी गई। साथ ही एनडीपीएस अधिनियम, 1985 और पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम, 1988 के बीच के मूलभूत अंतर को भी स्पष्ट किया गया।

न्यायालयीन निर्णयों का संदर्भ

मादक पदार्थों से संबंधित मामलों की जांच को अधिक मजबूत बनाने के लिए उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया गया। अधिकारियों को यह भी बताया गया कि साक्ष्यों, पंचनामों और दस्तावेजों की कानूनी रूप से सुदृढ़ तैयारी कैसे की जाए, ताकि न्यायालय में अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत रह सके और आरोपी तकनीकी कारणों से बच न सकें।

प्रभावी कार्रवाई में मिलेगी मदद

इस प्रशिक्षण के माध्यम से जिले के पुलिस अधिकारियों को मादक पदार्थ विरोधी कानूनों की गहन जानकारी प्राप्त हुई। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इससे भविष्य में जांच, निवारक कार्रवाई और न्यायालयीन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी।

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