सभापति महोदय की ओर से ‘धोंडा भोज’!

रोजगार मेला आयोजित किया होता तो लाडकी बहन और दाजी को राहत नहीं मिलती क्या? – रोहिणी खडसे का सवाल

जलगांव: विधान परिषद के सभापति राम शिंदे द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र की बेटियों और दामादों के लिए आयोजित किए गए ‘धोंडा भोज’ कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। इस मुद्दे पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की महिला प्रदेशाध्यक्ष रोहिणी खडसे ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इस तरह के भोज के बजाय रोजगार मेला आयोजित किया गया होता, तो “लाडकी बहन” और “दाजी” को वास्तविक राहत मिल सकती थी।

रोहिणी खडसे ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस कार्यक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने आम लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई इतनी बढ़ गई है कि लोगों के घरों में पैसा टिक नहीं रहा है, जबकि बेरोजगारी के कारण कई युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है और कुछ लोग अपनी नौकरी भी खो चुके हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में धोंडा भोज जैसे कार्यक्रमों पर खर्च करने के बजाय यदि रोजगार मेले का आयोजन किया जाता, तो युवाओं और परिवारों को अधिक लाभ मिलता। खडसे ने सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें “अपने ही पैरों पर पत्थर मारने की आदत हो गई है।”

उनकी इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।

Don`t copy text!