शिवाजीनगरवासियों ने लिया शुक्र-गुरु की महायुति का आनंद

‘कॉस्मिक किस’ बना खगोलप्रेमियों के लिए अद्भुत आकर्षण

जळगांव | प्रतिनिधि

मंगलवार, 9 जून 2026 की शाम जळगांव के शिवाजीनगर क्षेत्र में नागरिकों को एक अविस्मरणीय खगोलीय अनुभव प्राप्त हुआ। ‘निसर्गमित्र, जळगांव’ की ओर से आयोजित विशेष खगोलीय दर्शन कार्यक्रम में सूर्यमंडल के दो सबसे चमकीले ग्रह शुक्र (Venus) और गुरु (Jupiter) की महायुति का मनमोहक दृश्य देखने का अवसर मिला। पश्चिमी क्षितिज पर दोनों ग्रह एक-दूसरे के बेहद निकट दिखाई दिए, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘नेशनल जियोग्राफिक’ ने ‘कॉस्मिक किस’ नाम दिया है।

इस अवसर पर पक्षीमित्र राजेंद्र गाडगीळ और शिल्पा गाडगीळ ने उपस्थित नागरिकों को इस दुर्लभ खगोलीय घटना की वैज्ञानिक जानकारी दी। कार्यक्रम में सुरेश महांगडे, प्रदीप शिंदे, डॉ. पीयूष पाटील, महेश पवार, शैलजा शिंदे, किशोर गुजराथी तथा स्वामी साळुंके सहित अनेक नागरिकों ने सहभागिता की।

संध्या के समय लगभग 7 बजे से पश्चिमी आकाश में यह खगोलीय दृश्य स्पष्ट दिखाई देने लगा था। रात 7:45 से 8:15 बजे के बीच का समय अवलोकन के लिए सर्वश्रेष्ठ रहा, क्योंकि अंधेरा बढ़ने के साथ शुक्र की तेज चमक और गुरु का पीताभ रंग अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।

राजेंद्र गाडगीळ ने बताया कि यह महायुति वास्तव में ग्रहों का एक-दूसरे के निकट आना नहीं, बल्कि एक प्रकार का ‘ऑप्टिकल इल्यूजन’ यानी दृष्टिभ्रम है। इस विषय पर अधिक जानकारी देते हुए शिल्पा गाडगीळ ने बताया कि युति के समय शुक्र पृथ्वी से लगभग 18 करोड़ किलोमीटर तथा गुरु लगभग 90 करोड़ किलोमीटर दूर था। पृथ्वी से देखने पर दोनों ग्रह एक ही दृष्टि रेखा में दिखाई देने के कारण एक-दूसरे के पास प्रतीत हो रहे थे।

राजेंद्र गाडगीळ ने कहा, “यह घटना केप्लर के ग्रहों की गति संबंधी नियमों और ज्यामितीय संरचना का एक सुंदर प्राकृतिक उदाहरण है। इसका मानव जीवन पर किसी प्रकार का ज्योतिषीय प्रभाव नहीं होता।”

कार्यक्रम में उपस्थित खगोलप्रेमियों ने छोटी दूरबीनों के माध्यम से इस दुर्लभ घटना का आनंद लिया। दूरबीन से देखने पर गुरु ग्रह के चार प्रमुख उपग्रह—आयो, यूरोपा, गैनीमीड और कैलिस्टो—छोटे प्रकाश बिंदुओं के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रहे थे, जबकि दूसरी ओर शुक्र ग्रह अपने प्रखर प्रकाश से आकाश में चमक रहा था।

जळगांव के स्वच्छ एवं निरभ्र मौसम ने इस खगोलीय घटना के अवलोकन को और भी यादगार बना दिया। इससे नागरिकों को विज्ञान और अंतरिक्ष जगत के अद्भुत रहस्यों को नजदीक से समझने और अनुभव करने का अवसर मिला।

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