गणेशोत्सव पर्यावरणपूरक और शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं

महापौर दीपमाला मनोज काले का जलगांववासियों से आह्वान

जलगांव | प्रतिनिधि

लाडले बप्पा के आगमन को लेकर उत्साह चरम पर है। ऐसे में इस वर्ष जलगांववासी गणेशोत्सव को पर्यावरणपूरक, अनुशासित और सामाजिक सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाएं, ऐसा आह्वान जलगांव शहर महानगरपालिका की महापौर दीपमाला मनोज काले ने किया है।

उत्सव के दौरान शहर की सुंदरता, स्वच्छता और पर्यावरण को बनाए रखने के लिए नागरिकों के साथ ही सभी सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों को महानगरपालिका प्रशासन का सहयोग करने की अपील महापौर ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से की है।

पर्यावरणपूरक मूर्तियों का उपयोग : जलप्रदूषण रोकने के लिए संभव हो तो शाडू मिट्टी अथवा प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों की स्थापना की जाए। प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के बजाय पर्यावरणपूरक विकल्पों को प्राथमिकता दी जाए।

स्वच्छता और प्लास्टिक प्रतिबंध : उत्सव के दौरान मंडप परिसर में कचरा जमा न हो, इसका ध्यान रखा जाए। निर्माल्य सड़क या जलस्रोतों में न डालते हुए महानगरपालिका द्वारा रखे गए निर्माल्य कलश में ही डाला जाए। सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल का उपयोग पूरी तरह टाला जाए।

ध्वनिप्रदूषण पर नियंत्रण : डीजे और कानठलियां बैठाने वाले तेज आवाज के बजाय पारंपरिक वाद्ययंत्रों को प्राथमिकता दी जाए। वरिष्ठ नागरिकों, मरीजों और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ध्वनि की निर्धारित सीमा का पालन किया जाए।

सामाजिक उपक्रमों पर जोर : गणेशोत्सव मंडलों को केवल आकर्षक सजावट और झांकियों तक सीमित न रहते हुए रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच, वृक्षारोपण तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता जैसे सामाजिक उपक्रम आयोजित कर सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

शांति और सुरक्षा : विसर्जन जुलूस तथा उत्सव के दौरान यातायात बाधित न हो, इसका ध्यान रखते हुए पुलिस और महानगरपालिका प्रशासन को सहयोग किया जाए।

“गणेशोत्सव केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। अपने बप्पा का स्वागत करते समय पर्यावरण की रक्षा करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। जलगांव शहर को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रत्येक शहरवासी को जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपना योगदान देना चाहिए।”

— दीपमाला मनोज काले, महापौर, जलगांव शहर महानगरपालिका

Don`t copy text!