बाल श्रम के खिलाफ जळगांव पुलिस की विशेष मुहिम; दो मामले दर्ज

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर व्यापक कार्रवाई, गैराज में बच्चों से काम कराने वालों पर केस

जळगांव | प्रतिनिधि

12 जून को मनाए जाने वाले विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के मद्देनज़र जळगांव जिला पुलिस ने 8 जून से बाल श्रम उन्मूलन के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत जिलेभर में खोज एवं बचाव कार्रवाई चलाते हुए जळगांव तालुका पुलिस थाने में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।

बाल श्रम के खिलाफ पुलिस की पहल

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के मूल अधिकारों पर गंभीर आघात है। इसी उद्देश्य से बच्चों को शोषण और खतरनाक कार्यों से मुक्त कराने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

कई स्थानों पर गोपनीय जांच

अभियान के तहत होटल, ढाबे, गैराज, कारखाने, स्क्रैप यूनिट, ईंट-भट्टे, सड़क किनारे स्टॉल, निर्माण स्थल, खतरनाक उद्योग, डंपिंग ग्राउंड, केमिकल यूनिट तथा कांच उद्योगों में गोपनीय जांच की जा रही है।

कार्रवाई में सादे कपड़ों में पुलिस दल, महिला अधिकारी, चाइल्ड वेलफेयर अधिकारी, महिला पंच तथा मानव तस्करी विरोधी कक्ष (AHTU) के कर्मियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

अभियान के दौरान जळगांव तालुका पुलिस थाने में दो मामले दर्ज किए गए हैं।

अपराध क्रमांक 176/2026 में आरोपी अरबाज अजीज खाटीक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 146, बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम की धारा 3 तथा जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम की धारा 79 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी पर एक नाबालिग बच्चे को गैराज में खतरनाक कार्य कराने का आरोप है।

इसी प्रकार अपराध क्रमांक 177/2026 में भगवान पाटील के खिलाफ भी समान धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उस पर भी एक बालक को गैराज में कार्य पर लगाने का आरोप है।

कानून क्या कहता है?

कानून के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी व्यवसाय में काम पर रखना पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को खतरनाक उद्योगों में काम पर लगाना भी दंडनीय अपराध है।

पुलिस के अनुसार कई मामलों में बाल श्रम का संबंध मानव तस्करी, अवैध बंधक बनाना, शारीरिक शोषण और अन्य गंभीर अपराधों से भी जुड़ा होता है। इसलिए इस समस्या को केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन के रूप में नहीं, बल्कि बाल संरक्षण के व्यापक मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए।

नागरिकों से सहयोग की अपील

जळगांव जिला पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल श्रम की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या संबंधित सरकारी एजेंसियों को सूचना दें, ताकि बच्चों को शोषण से मुक्त कराया जा सके।

> “बच्चों के हाथों में औजार नहीं, शिक्षा की किताबें होनी चाहिए। बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।” – जळगांव जिला पुलिस प्रशासन।

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