प्रो. डॉ. सुनील नेवे ने किया ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स का गहन अध्ययन इंग्लैंड अध्ययन दौरे के दौरान ब्रिटिश संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली का लिया विस्तृत जायजा प्रतिनिधि | लंदन इंग्लैंड अध्ययन दौरे के दौरान भालोद स्थित कला एवं विज्ञान महाविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील नेवे ने लंदन स्थित यूके संसद भवन (पैलेस ऑफ वेस्टमिंस्टर) का दौरा कर ब्रिटिश संसदीय लोकतंत्र का गहन अध्ययन किया। इस अध्ययन यात्रा के दौरान उन्होंने संसद के दोनों सदनों – हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स – का भ्रमण कर उनकी कार्यप्रणाली, अधिकार, परंपराओं तथा विधि निर्माण प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। हाउस ऑफ कॉमन्स ब्रिटिश लोकतंत्र का प्रमुख जनप्रतिनिधि सदन है, जहां निर्वाचित सांसद जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। सरकार की जवाबदेही तय करना, प्रश्नकाल, विधेयकों पर चर्चा, बजट पारित करना और सरकार पर नियंत्रण रखना जैसे महत्वपूर्ण कार्य इसी सदन में संपन्न होते हैं। वहीं, हाउस ऑफ लॉर्ड्स ब्रिटेन का उच्च सदन है, जहां विधेयकों की गहन समीक्षा, विशेषज्ञ चर्चा और संवैधानिक विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता है। इस सदन का ऐतिहासिक सिंहासन, सदियों पुरानी संसदीय परंपराएं तथा राज्य उद्घाटन समारोह से जुड़ी जानकारी विशेष अध्ययन का विषय रही। हजार वर्षों की संसदीय परंपरा का अध्ययन प्रो. डॉ. नेवे ने ब्रिटिश संसद के लगभग एक हजार वर्षों के इतिहास, मैग्ना कार्टा से विकसित हुई संसदीय परंपराओं, संसदीय समितियों की कार्यप्रणाली, विपक्ष की भूमिका, संसदीय अनुशासन, ऐतिहासिक दीर्घाओं, वास्तुकला और संसदीय पुस्तकालय का भी अध्ययन किया। भारत और ब्रिटेन की संसदीय व्यवस्था में अंतर उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में विपक्ष ‘शैडो कैबिनेट’ (छाया मंत्रिमंडल) का गठन करता है, जिसमें सरकार के प्रत्येक मंत्री पर नजर रखने के लिए विपक्ष का एक समानांतर मंत्री होता है। यदि सरकार गिर जाती है, तो यह विपक्ष तुरंत शासन संभालने के लिए तैयार रहता है। भारत में विपक्ष को महत्व तो प्राप्त है, लेकिन शैडो कैबिनेट जैसी कोई औपचारिक व्यवस्था नहीं है। प्रो. डॉ. नेवे ने कहा, “भारतीय संविधान ने ब्रिटिश संसदीय प्रणाली को अपनाया है, लेकिन भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, लिखित संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका और संघीय व्यवस्था के कारण अपनी अलग पहचान बनाई है।” उन्होंने कहा कि भारत में संविधान सर्वोच्च है और सर्वोच्च न्यायालय न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) के माध्यम से संसद द्वारा बनाए गए किसी भी असंवैधानिक कानून को निरस्त कर सकता है। इसके विपरीत, ब्रिटेन में संसदीय सर्वोच्चता (Parliamentary Sovereignty) की व्यवस्था है और वहां की संसद द्वारा बनाए गए कानून को न्यायालय अवैध घोषित नहीं कर सकता। भारत गणराज्य, ब्रिटेन संवैधानिक राजशाही भारत में राष्ट्रप्रमुख राष्ट्रपति होते हैं, जिनका चुनाव निश्चित अवधि के लिए किया जाता है, जबकि ब्रिटेन में राजा या रानी वंशानुगत रूप से राष्ट्रप्रमुख बनते हैं। भारत की लोकसभा (543 सदस्य) और ब्रिटेन का हाउस ऑफ कॉमन्स (650 सदस्य) दोनों सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं और वास्तविक राजनीतिक शक्ति इन्हीं सदनों के पास होती है। वहीं, भारत की राज्यसभा (245 सदस्य) राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि ब्रिटेन का हाउस ऑफ लॉर्ड्स (लगभग 800 सदस्य) मुख्यतः नामित और वंशानुगत सदस्यों का सदन है। प्रो. डॉ. सुनील नेवे ने कहा कि राजनीति शास्त्र के अध्यापक के रूप में यह अनुभव विद्यार्थियों को वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं से परिचित कराने तथा तुलनात्मक राजनीति के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। Post navigation कन्हेर में बोरी नदी पर ब्रिज-कम-बांध निर्माण को मुख्यमंत्री के निर्देश जलगांव में सड़क निर्माण से पहले समुचित योजना बनाने की मांग