शिवसेना की बागी उम्मीदवार रेश्मा काले का ऐलान: “लड़ाई पूरी करेंगे, जीतेंगे या हारेंगे!”

विधान परिषद चुनाव में माघार से इनकार; किसी उम्मीदवार को समर्थन भी नहीं दिया, रेश्मा काले की दोटूक भूमिका

जलगांव | प्रतिनिधि

जलगांव विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच शिवसेना की बागी उम्मीदवार रेश्मा कुंदन काले ने अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए चुनाव मैदान में डटे रहने का ऐलान किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वरिष्ठ नेताओं के आदेश नहीं मिलने के कारण उन्होंने अपना नामांकन वापस नहीं लिया है और उन्होंने किसी भी उम्मीदवार को समर्थन भी नहीं दिया है।

रेश्मा काले ने कहा, “मुझे अब तक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिला है। इसलिए मैंने अपना नामांकन वापस नहीं लिया। मैं किसी भी उम्मीदवार के समर्थन में भी नहीं हूं। अब लड़ाई पूरी करेंगे, जीतेंगे या हारेंगे, इसका फैसला जनता और मतदाता करेंगे।”

उनके इस बयान के बाद विधान परिषद चुनाव की राजनीतिक समीकरणों में नया मोड़ आ गया है। महायुति के भीतर सब कुछ ठीक नहीं होने की चर्चा पहले से ही चल रही थी, ऐसे में रेश्मा काले के चुनाव मैदान में बने रहने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रेश्मा काले की उम्मीदवारी चुनाव परिणामों पर असर डाल सकती है। वहीं, उनके इस रुख से संबंधित दलों की रणनीति भी प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त हो चुकी है और अब सभी की नजरें मतदान प्रक्रिया तथा चुनावी परिणामों पर टिकी हुई हैं। रेश्मा काले के इस स्पष्ट और आक्रामक रुख ने चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बना दिया है।

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