विद्यार्थियों को प्रायोगिक, कौशल आधारित और रोजगारपरक शिक्षा देने की दिशा में विश्वविद्यालय की पहल– शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील जलगांव, दि. 29 : राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों को केवल कक्षा में पुस्तकीय ज्ञान देने के बजाय प्रायोगिक, कौशल आधारित एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कवयित्री बहिणाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय निरंतर आगे बढ़ रहा है। यह प्रतिपादन राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने किया। कवयित्री बहिणाबाई चौधरी उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय में प्रस्तावित छात्रावास क्रमांक-4, ‘सेंटर फॉर ट्रेनिंग फॉर कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन’ तथा ‘सोफिस्टिकेटेड एनालिटिकल इंस्ट्रुमेंटेशन फैसिलिटी सेंटर’ के फेज-1 भवन का भूमिपूजन किया गया। इसके साथ ही पीएम-उषा निधि के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर में 10 स्थानों पर स्थापित अत्याधुनिक कंटेंट स्टूडियो तथा नंदुरबार स्थित आदिवासी अकादमी द्वारा संचालित आदिवासी अध्ययन केंद्र का ऑनलाइन उद्घाटन भी मंत्री चंद्रकांत पाटील के हाथों 29 अगस्त को किया गया। इसी अवसर पर विश्वविद्यालय के बी.ए. एप्लाइड सोशल साइंसेज पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को वास्तविक कार्यक्षेत्र का अनुभव तथा व्यावसायिक कौशल विकसित करने के उद्देश्य से कांताई नेत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन किया गया। इस समझौते पर डॉ. भावना जैन एवं विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विनोद पाटील ने हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. व्ही. एल. माहेश्वरी ने की। मंच पर विश्वविद्यालय सलाहकार समिति के अध्यक्ष अशोक जैन, प्रति-कुलपति प्रो. एस. टी. इंगले, राज्यपाल नियुक्त प्रबंधन परिषद सदस्य राजेंद्र नन्नवरे, प्राचार्य डॉ. जगदीश पाटील, प्राचार्य डॉ. शिवाजी पाटील, प्राचार्य डॉ. एस. एस. राजपूत, प्रो. सुरेखा पालवे, एड. अमोल पाटील, नितीन झाल्टे, डॉ. पवित्रा पाटील, उच्च शिक्षा सहसंचालक डॉ. पराग मसराम, कुलसचिव डॉ. विनोद पाटील, वित्त एवं लेखाधिकारी सीए रवींद्र पाटील तथा परीक्षा एवं मूल्यांकन मंडल के संचालक प्रो. योगेश पाटील उपस्थित थे। मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रायोगिक ज्ञान को विशेष महत्व दिया गया है। केवल कक्षा में बैठकर विद्यार्थियों को वास्तविक प्रायोगिक ज्ञान नहीं मिल सकता। इसलिए विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने तथा उनके कौशल को सही दिशा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में विभिन्न उपक्रम एवं सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में भी अच्छा स्थान हासिल किया है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ विद्यार्थियों को भविष्य में उपलब्ध होने वाले रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करने पर जोर दिया। विद्यार्थियों को केवल सरकारी नौकरी के पीछे न भागकर व्यावसायिक शिक्षा हासिल कर उद्यमी बनने का दृष्टिकोण रखना चाहिए। व्यवसायपरक शिक्षा के साथ ही विद्यार्थियों को उद्योग एवं व्यवसाय क्षेत्र में प्रवेश के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, विकल्प और अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इस दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि ‘कमाओ और सीखो’ योजना का विस्तार किया जाएगा और विश्वविद्यालय से ऐसे विद्यार्थी तैयार होने चाहिए, जिनमें सर्वांगीण विकास के साथ विभिन्न प्रकार के कौशल विकसित हों। मंत्री पाटील ने कहा कि विकसित भारत और विकसित महाराष्ट्र का सपना पूरा करने में विद्यार्थी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए महाराष्ट्र सरकार विभिन्न योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालयों को सक्रिय पहल करनी चाहिए। विश्वविद्यालय सलाहकार समिति के अध्यक्ष अशोक जैन ने कहा कि आज का दिन केवल विभिन्न विकास कार्यों के उद्घाटन का दिन नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय और आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए आधुनिकीकरण की शुरुआत करने वाला महत्वपूर्ण दिन है। विश्वविद्यालय में हो रहे विभिन्न विकास कार्यों से विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं और कौशल आधारित शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे। इस अवसर पर जैन उद्योग समूह तथा भंवरलाल जैन कांताई जैन फाउंडेशन की ओर से छात्रावास के निर्माण के लिए 11 लाख 11 हजार 111 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई। अध्यक्षीय समापन में कुलपति प्रो. व्ही. एल. माहेश्वरी ने कहा कि 35 वर्षों की यात्रा में विश्वविद्यालय ने केवल अपना अस्तित्व कायम नहीं रखा, बल्कि राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा भी स्थापित की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं का विश्वविद्यालय द्वारा प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के लगभग दो हजार शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद सभी विद्यार्थियों को भी एआई प्रशिक्षण देने की योजना है। भविष्य में शिक्षा और रोजगार के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित आधुनिक तकनीक का ज्ञान देने पर विश्वविद्यालय का विशेष जोर रहेगा। कुलपति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवयित्री बहिणाबाई चौधरी अध्यासन केंद्र, नई स्कूल ऑफ इंटेलिजेंट सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज, छात्रावास क्रमांक-4, स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म तथा आदिवासी अध्यासन केंद्र के निर्माण के लिए राज्य सरकार से सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने विभिन्न संस्थाओं तथा भारत सरकार की विभिन्न परियोजनाओं के साथ 17 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा, प्रशिक्षण एवं प्रत्यक्ष अनुभव के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। कार्यक्रम का प्रास्ताविक प्रति-कुलपति प्रो. एस. टी. इंगले ने किया। संचालन प्रो. वीणा महाजन ने किया, जबकि आभार कुलसचिव डॉ. विनोद पाटील ने माना। Post navigation उड्डाणपुल के पास से कार सहित 75 हजार रुपये का सामान चोरी जीतना महत्वपूर्ण, लेकिन खेल भावना बनाए रखना उससे भी ज्यादा जरूरी : पालकमंत्री गुलाबराव पाटील