पानी हमारा अधिकार है, भीख नहीं!

जल संकट के विरोध में 22 जून को निकाला जाएगा विशाल मोर्चा

दो दिन में एक बार पानी देने का वादा, लेकिन हकीकत में 8-8 दिन तक नहीं हो रही जलापूर्ति

अमलनेर : नगर परिषद द्वारा जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर किए जा रहे कुप्रबंधन के कारण शहरवासियों के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सत्ताधारियों की आंतरिक राजनीति और दूरदर्शिता के अभाव के चलते नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद नागरिकों से भारी जलकर वसूल रही है, लेकिन नियमित पानी उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रही है। परिणामस्वरूप लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

नगर परिषद चुनाव के दौरान सत्ताधारियों ने शहरवासियों को दो दिन में एक बार पानी उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन यह वादा केवल घोषणा बनकर रह गया है। वास्तव में शहर के नागरिकों को पानी उपलब्ध कराना नगर परिषद की जिम्मेदारी है। पानी नागरिकों का अधिकार है, कोई भीख नहीं। वर्तमान में शहर की सबसे गंभीर समस्या नियमित और सुचारू जलापूर्ति की है। इसी मुद्दे को लेकर शहर विकास आघाड़ी की ओर से 22 जून को सुबह 10 बजे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा से नगर परिषद कार्यालय तक एक विशाल मोर्चा निकाला जाएगा। संगठन ने अधिक से अधिक नागरिकों से इस मोर्चे में शामिल होने की अपील की है।

शहर विकास आघाड़ी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि अमलनेरवासियों के सामने आज सबसे बड़ी समस्या पानी की है। नगर परिषद चुनाव के दौरान दो दिन में एक बार पानी देने का वादा किया गया था, लेकिन आज कई क्षेत्रों में 8-8 दिनों तक जलापूर्ति नहीं हो रही है। पीने के पानी का प्रश्न अब लोगों के जीवन और अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा बन गया है। जनता ने जिन लोगों को विश्वास के साथ सत्ता सौंपी थी, उन्हीं लोगों ने नागरिकों को प्यासा छोड़ दिया है।

संगठन का आरोप है कि जल संकट के कारण पूरा शहर बदहाल हो गया है। जगह-जगह सड़कों पर गड्ढे होने से दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। भूमिगत नाली निर्माण कार्यों के कारण शहर की हालत खराब हो गई है। स्वच्छता व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कई स्थानों पर नालियां जाम हैं, जिससे दुर्गंध और गंदगी फैल रही है। जून महीना समाप्ति की ओर है, लेकिन मानसून पूर्व सफाई का कोई नियोजन नहीं किया गया है।

बयान में यह भी कहा गया है कि नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए नगर परिषद को नियमित रूप से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठकें आयोजित करनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके कारण नागरिकों की शिकायतों की अनदेखी की जा रही है। अधिकारी और कर्मचारी जवाबदेही से बचने में लगे हुए हैं तथा जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय का अभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। शहर विकास के मामले में लगातार पीछे जा रहा है।

कई सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें बंद होने से नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। शहर की मूलभूत नागरिक सुविधाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं। यह केवल नगर परिषद प्रशासन की विफलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और उनके संवैधानिक अधिकारों का भी अपमान है।

इसी पृष्ठभूमि में शहर विकास आघाड़ी ने नागरिकों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में मोर्चे में शामिल हों और अपने साथ हांडे एवं मटके लेकर जल संकट के विरोध में आवाज बुलंद करें।

अमलनेरवासियों से अंतिम और दृढ़ अपील

अमलनेरवासियों, अब समय आ गया है कि आप अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरें। नगर परिषद से जवाब मांगें और तब तक पीछे न हटें जब तक समस्या का समाधान न हो जाए। यह संघर्ष केवल पानी के लिए नहीं, बल्कि जीवन के अधिकार और अमलनेर के सम्मान के लिए है। यदि आज आवाज नहीं उठाई, तो कल बहुत देर हो जाएगी। इसलिए अधिक से अधिक संख्या में मोर्चे में शामिल होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाएं।

Don`t copy text!