खुले में कचरा फेंकने वालों पर सीधे जुर्माना लगाएं, प्रतिबंधित प्लास्टिक बेचने वाली दुकानों को करें सील : महापौर दीपमाला काले

स्वच्छता और स्वास्थ्य के मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं

जलगांव, 8 जून: आगामी मानसून को देखते हुए शहर में स्वच्छता बनाए रखने तथा नालों और नालियों को जाम होने से रोकने के लिए जलगांव महानगरपालिका की महापौर दीपमाला काले ने सोमवार को मनपा कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग, मलेरिया विभाग और बीवीजी (BVG) कंपनी के अधिकारियों की संयुक्त आपात बैठक आयोजित की। बैठक में महापौर ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

खुले में कचरा फेंकने वालों पर होगी कार्रवाई

बैठक में महापौर दीपमाला काले ने कहा कि यदि कोई नागरिक या व्यापारी सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकता हुआ पाया जाता है तो उस पर बिना किसी रियायत के सीधे जुर्माना लगाया जाए। विशेष रूप से खाद्य पदार्थ विक्रेता, गन्ने का रस बेचने वाले तथा अन्य व्यवसायी यदि खुले में कचरा डालते हैं तो उनके खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर “यहां कचरा न डालें” के बोर्ड लगे होने के बावजूद लोग वहीं कचरा फेंकते हैं। अब ऐसी लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रतिबंधित प्लास्टिक बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई

महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भी प्रतिबंधित प्लास्टिक की थैलियां बेची जा रही हैं, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित दुकानों को सील किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्लास्टिक के गिलास और थर्माकोल पर प्रतिबंध लागू है तथा इसकी जानकारी व्यापारियों को दी जाए।

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के कारण ही नालियां और गटर जाम होते हैं। इसलिए नागरिकों को बायोडिग्रेडेबल और कपड़े के थैलों के उपयोग के लिए पुनः जागरूक किया जाए।

‘मेरा जलगांव, स्वच्छ जलगांव’ अभियान पर जोर

महापौर ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सड़कों की सफाई के बाद कचरे का तुरंत उठाव सुनिश्चित किया जाए। घंटागाड़ियों की समय-सारिणी की नियमित समीक्षा की जाए तथा प्रत्येक वार्ड में स्वच्छता बनाए रखी जाए। नालियों और सड़कों की सफाई प्रतिदिन होनी चाहिए और कचरे का नियमित संकलन किया जाना चाहिए।

डेंगू और संक्रामक रोगों की रोकथाम पर विशेष ध्यान

बैठक में मलेरिया विभाग की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएं। फॉगिंग मशीन, दवा छिड़काव और अन्य संसाधनों की उपलब्धता का भी जायजा लिया गया।

अधिकारियों को फील्ड में उतरने के निर्देश

महापौर ने कहा कि बारिश के दौरान नागरिकों के घरों में पानी भरने या नालों के जाम होने जैसी शिकायतें सामने नहीं आनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी पुरानी शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाए। अधिकारी और कर्मचारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से फील्ड में जाकर निरीक्षण करें।

भ्रष्टाचार और दबाव के खिलाफ चेतावनी

दीपमाला काले ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य विभाग में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी कर्मचारी द्वारा अवैध रूप से पैसे लेने की शिकायत मिली तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि यदि किसी प्रकार का दबाव, धमकी या उपस्थिति संबंधी समस्या हो तो इसकी जानकारी तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को दें। स्वास्थ्य विभाग और बीवीजी कंपनी के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ शहर के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए काम करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में प्रभारी स्वास्थ्य अधीक्षक समीर बोरोले, स्वच्छता निरीक्षक रमेश कांबले, मलेरिया विभाग के सुधीर सोनवणे, वीर दहियेकर, रविंद्र निकम तथा बीवीजी कंपनी के अधिकारी विनोद रेड्डी, प्रशांत पवार, योगेश पाटील और श्रीकांत हंगे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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