खगोलप्रेमियों के लिए सौगात: 9 जून को देशभर में नंगी आंखों से दिखेगी शुक्र और बृहस्पति ग्रहों की दुर्लभ युति जलगांव | प्रतिनिधि खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए 9 जून 2026 की शाम बेहद खास रहने वाली है। सौरमंडल के दो सबसे चमकीले और विशाल ग्रह शुक्र (Venus) और बृहस्पति (Jupiter) आकाश में एक-दूसरे के अत्यंत निकट दिखाई देंगे। खगोल विज्ञान में इस घटना को ग्रह युति (Conjunction) कहा जाता है। जलगांव सहित महाराष्ट्र और पूरे भारत में यह अद्भुत खगोलीय दृश्य नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकेगा। पक्षीमित्र एवं खगोलप्रेमी राजेंद्र गाडगीळ ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध नेशनल जियोग्राफिक ने इस दुर्लभ घटना को “कॉस्मिक किस” (Cosmic Kiss) नाम दिया है। पृथ्वी से देखने पर शुक्र और बृहस्पति के बीच केवल 1.5 से 1.6 डिग्री का कोणीय अंतर दिखाई देगा, जिससे ऐसा लगेगा मानो दोनों ग्रह एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए हों। शाम 7:30 से 8:30 बजे तक रहेगा सर्वोत्तम समय सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में यह दृश्य देखा जा सकेगा। शाम लगभग 7:30 बजे से 8:30 बजे के बीच दोनों ग्रह स्पष्ट रूप से चमकते दिखाई देंगे। पश्चिमी क्षितिज पर हीरे की तरह चमकता शुक्र ग्रह और उसके निकट हल्के पीले रंग का बृहस्पति ग्रह आसानी से पहचाना जा सकेगा। खगोल विशेषज्ञों के अनुसार 7:45 से 8:15 बजे का समय अवलोकन के लिए सबसे उपयुक्त रहेगा। वास्तव में पास नहीं, केवल दृष्टिभ्रम विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल एक ऑप्टिकल इल्यूजन (दृष्टिभ्रम) है। वास्तविकता में शुक्र ग्रह पृथ्वी से लगभग 18 करोड़ किलोमीटर दूर होगा, जबकि बृहस्पति की दूरी लगभग 90 करोड़ किलोमीटर रहेगी। दोनों ग्रहों के बीच करोड़ों किलोमीटर का अंतर होने के बावजूद पृथ्वी से देखने पर वे एक ही दृष्टि रेखा में दिखाई देते हैं, जिससे उनके पास होने का भ्रम पैदा होता है। अलग-अलग गति से घूमते हैं ग्रह शुक्र ग्रह सूर्य की एक परिक्रमा लगभग 225 दिनों में पूरी करता है, जबकि बृहस्पति को यही चक्कर लगाने में लगभग 12 वर्ष लगते हैं। दोनों ग्रह अपनी-अपनी गति से सूर्य की परिक्रमा करते हुए जब पृथ्वी से देखने पर एक सीध में आ जाते हैं, तब ऐसी ग्रह युति बनती है। बृहस्पति के चार चंद्रमा भी देख सकेंगे इस युति की एक और विशेषता यह है कि शुक्र ग्रह का कोई प्राकृतिक उपग्रह नहीं है, जबकि बृहस्पति को सौरमंडल का “उपग्रहों का राजा” कहा जाता है। वर्तमान शोध के अनुसार बृहस्पति के 95 आधिकारिक चंद्रमा हैं। यदि किसी के पास दूरबीन या साधारण बाइनोक्युलर हो, तो वह बृहस्पति के चार प्रमुख गैलीलियन उपग्रह – आयो, यूरोपा, गैनीमीड और कैलिस्टो भी देख सकता है। अंधविश्वास नहीं, विज्ञान का सुंदर दृश्य राजेंद्र गाडगीळ ने नागरिकों से अपील की है कि इस खगोलीय घटना को किसी भी प्रकार की ज्योतिषीय मान्यताओं या अंधविश्वास से न जोड़ें। यह केवल ग्रहों की गति और उनकी ज्यामितीय स्थिति का परिणाम है। मौसम अनुकूल रहने की संभावना है, इसलिए नागरिक अपने घरों की छत, खुले मैदान या किसी ऊंचे स्थान से इस अद्भुत खगोलीय दृश्य का आनंद लें और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं। Post navigation खुले में कचरा फेंकने वालों पर सीधे जुर्माना लगाएं, प्रतिबंधित प्लास्टिक बेचने वाली दुकानों को करें सील : महापौर दीपमाला काले जैन हिल्स में फाली अधिवेशन का समापन, इनोवेशन में कोल्हापुर और बिजनेस प्लान में जलगांव की अनुभूति स्कूल अव्वल