सूखाग्रस्त किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की मदद दें पंचनामा की शर्तों में न उलझाते हुए तत्काल सहायता और फसल ऋण माफी की मांग; केले के पत्ते पर राजस्व मंत्री को सौंपा ज्ञापन जलगांव, प्रतिनिधि : जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान कम बारिश के कारण फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रभावित किसानों को पंचनामा की तकनीकी शर्तों में न उलझाते हुए सीधे प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए तथा फसल ऋण तत्काल माफ किया जाए, ऐसी मांग खानदेश केला उत्पादक किसान संघर्ष समिति ने सरकार से की है। समिति के अध्यक्ष प्रो. भाऊसाहेब सोनवणे के नेतृत्व में रविवार को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे को केले के पत्ते पर ज्ञापन सौंपकर किसानों की विभिन्न मांगों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया। खरीफ सीजन में अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण उड़द, मूंग, सोयाबीन और मक्का सहित विभिन्न फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। सरकार द्वारा ट्रिगर-1 के मानदंडों के अनुसार घोषित सूखाग्रस्त तहसीलों में जलगांव जिले की सभी तहसीलों को शामिल किया गया है। हालांकि, गांव स्तर पर फसलों के पंचनामे करते समय किसानों के सामने तकनीकी परेशानियां आने की बात समिति ने ज्ञापन में कही है। फसलें खराब होने के कारण कई किसानों ने उड़द, मूंग, सोयाबीन और मक्का की फसलें खेतों से निकाल दी हैं। ऐसे में वर्तमान में खेतों में खड़ी फसल नहीं होने के कारण पंचनामा करते समय जियो-टैग फोटो लेना संभव नहीं हो पा रहा है। खड़ी फसल का फोटो उपलब्ध नहीं होने पर ऐसे किसानों के नुकसान भरपाई से वंचित रहने की आशंका है। इसलिए वास्तविक नुकसान के आधार पर पंचनामा करने के संबंध में संबंधित विभाग को तत्काल स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, ऐसी मांग समिति ने की है। कम बारिश के कारण सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसान, खेत मजदूर और ग्रामीण आर्थिक संकट में फंस गए हैं। फसलें बर्बाद होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। वहीं, कई गांवों में पीने के पानी के साथ पशुओं के चारे की समस्या भी गंभीर हो गई है। इसलिए सभी प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाए तथा पात्र किसानों को फसल बीमा की राशि तत्काल वितरित की जाए, ऐसी मांग की गई है। पंचनामे पूरे होने के 30 दिनों के भीतर प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता का वितरण शुरू किया जाए, यह मांग भी ज्ञापन के माध्यम से की गई है। सूखाग्रस्त किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये नकद सहायता देने के साथ ही संपूर्ण फसल ऋण माफ किया जाए। आगामी रबी सीजन के लिए किसानों को मुफ्त अथवा भारी अनुदान पर बीज उपलब्ध कराए जाएं। खाद की पर्याप्त और सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उपलब्ध पानी के आधार पर फसल नियोजन के लिए मार्गदर्शन किया जाए तथा ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के लिए विशेष तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए, ऐसी मांग समिति ने की है। फसल बीमा से संबंधित शिकायतों का तत्काल समाधान करने के लिए प्रत्येक जिले में फसल बीमा अदालत आयोजित की जाए, ऐसी मांग भी की गई है। इन अदालतों में किसानों के बीमा दावों, खारिज किए गए दावों और अन्य शिकायतों को प्रत्यक्ष रूप से सुना जाए तथा उन पर तत्काल निर्णय लिया जाए, ऐसा ज्ञापन में कहा गया है। सूखे के कारण कृषि अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना आवश्यक है। समिति ने कपास को प्रति क्विंटल 12 हजार रुपये तक का भाव देने की मांग भी की है। सूखाग्रस्त जनता की आर्थिक और सामाजिक परेशानी रोकने के लिए सरकार इन सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर तत्काल निर्णय ले तथा सहायता के लिए आवश्यक निधि तुरंत उपलब्ध कराए, ऐसी मांग ज्ञापन के माध्यम से की गई। इस अवसर पर किसान प्रतिनिधि प्रमोद घुगे, अशोक पाटील, प्रभाकर कोळी, लोटन सोनवणे सहित अन्य किसान उपस्थित थे। Post navigation चलती ट्रेन की चपेट में आने से युवक की दर्दनाक मौत चेतन वाणी : कलम की धार से जनसरोकारों तक