टीम झूलेलाल न्यूज़ जलगां : पालधी-तरसोद बायपास मार्ग बंद होने के कारण जलगांव शहर से भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई थी। इस दौरान हुए सड़क हादसों में सात निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। अब बायपास दोबारा शुरू हो गया है और यातायात भी सामान्य होने लगा है, लेकिन इन सात परिवारों के जीवन में आई कमी आज भी बरकरार है।

इन मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा कौन देगा, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है। इसी बीच मुंबई हाईकोर्ट के सड़क सुरक्षा संबंधी आदेश को लागू करने के निर्देश जिलाधिकारी कार्यालय ने जलगांव महानगरपालिका को दिए हैं। इससे हादसों में जान गंवाने वालों के परिवारों को मुआवजा देने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

पालधी-तरसोद बायपास मार्ग का भराव धंसने के कारण अगस्त की शुरुआत में इस मार्ग को यातायात के लिए बंद कर दिया गया था। इसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले भारी वाहनों को जलगांव शहर से डायवर्ट किया गया। आकाशवाणी चौक, इच्छादेवी चौक और अजिंठा चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया। पहले से यातायात का भार झेल रही शहर की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया। इसी अवधि में हुए हादसों में सात नागरिकों की मौत के बाद शहर में आक्रोश देखने को मिला था।

नगरसेवक अरविंद देशमुख ने उठाया मुद्दा

इस मामले में नगरसेवक अरविंद देशमुख ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। बायपास निर्माण की खामियों और संबंधित विभागों की कथित लापरवाही को लेकर उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और जिला प्रशासन के समक्ष लगातार पैरवी की। संबंधित ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग भी उन्होंने की।

इसके बाद जलगांव महानगरपालिका की महासभा में मुद्दा उठाते हुए उन्होंने प्रशासन को घेरा था। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा था, “ये हादसे नहीं, हत्याएं हैं।” साथ ही सात मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की मांग की थी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद मनपा को निर्देश

मुंबई हाईकोर्ट ने जनहित याचिका क्रमांक 71/2013 में 13 अक्टूबर 2025 को दिए आदेश में जिम्मेदारी तय करने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। इसी आदेश के संदर्भ में जलगांव जिलाधिकारी कार्यालय की गृह शाखा ने 29 सितंबर 2026 को महानगरपालिका आयुक्त को पत्र भेजा है।

पत्र में न्यायालय के आदेश के पैराग्राफ 70 (ii) के अनुसार महानगरपालिका आयुक्त और संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। दुर्घटना की जानकारी मिलने के सात दिनों के भीतर समिति की पहली बैठक और उसके बाद कम से कम प्रत्येक 15 दिन में मामलों की समीक्षा किए जाने की अपेक्षा है।

सात मौतों में जिम्मेदारी तय करने की मांग

न्यायालय का यह आदेश मुख्य रूप से गड्ढों और खुले मैनहोल के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से संबंधित है। हालांकि, बायपास बंद होने के कारण शहर में बढ़े भारी यातायात की पृष्ठभूमि में हुई सात मौतों के मामले में भी जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो रही है।

बायपास बंद करने के बाद वैकल्पिक यातायात व्यवस्था कितनी प्रभावी थी, नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए और दुर्घटनाएं रोकने के लिए संबंधित विभागों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह से निभाई या नहीं—इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।

साथ ही इन सात मौतों के मामलों में हाईकोर्ट के आदेश के तहत मुआवजे का प्रावधान लागू हो सकता है या नहीं, इसकी भी कानूनी जांच करनी होगी।

यदि बायपास बंद होने के बाद शहर में पैदा हुए खतरे को समय रहते गंभीरता से लिया जाता, तो क्या कुछ हादसों को रोका जा सकता था, यह सवाल भी अब उठ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, संबंधित ठेकेदार और यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर मृतकों के परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की जा रही है।

अब जिलाधिकारी कार्यालय के पत्र के बाद महानगरपालिका प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश को कब लागू करता है और बायपास बंद रहने के दौरान हुए हादसों में मृत नागरिकों के परिवारों के मुआवजे को लेकर क्या अलग कार्रवाई करता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

रस्ता शुरू हुआ, लेकिन सात परिवारों का क्या?

बायपास बंद होने के बाद शहर से भारी वाहनों की आवाजाही शुरू हुई। हादसे हुए और सात नागरिकों की जान चली गई। अब बायपास शुरू हो चुका है, लेकिन मृतकों के परिवारों का दुख आज भी कायम है।

इन परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए नगरसेवक अरविंद देशमुख ने महानगरपालिका की महासभा में आक्रामक तरीके से मुद्दा उठाया था। संबंधित विभागों और एजेंसियों की जिम्मेदारी तय कर इन सात परिवारों को न्याय कब मिलेगा, यह सवाल अब भी बना हुआ है।

मुआवजे के लिए समिति बनाने के निर्देश

मुंबई हाईकोर्ट के एक फैसले का संदर्भ देते हुए दुर्घटना के मामलों के लिए महानगरपालिका आयुक्त और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की समिति गठित करने के निर्देश जिलाधिकारी कार्यालय ने दिए हैं।

समिति दुर्घटना पीड़ितों के आवेदन, मृतकों के वारिसों के निवेदन तथा अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर मामलों का संज्ञान ले सकेगी। हालांकि, बायपास बंद होने की अवधि में हुई मौतों के मामलों में मुआवजे के लिए अलग कानूनी आधार और जिम्मेदारी तय करनी होगी।

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