जैन हिल्स की मिट्टी में नाना पाटेकर की यादें हमेशा जीवित रहेंगी

अशोक जैन ने जताया शोक; खेती, मिट्टी और किसानों से नाना का था आत्मीय रिश्ता

जलगांव, प्रतिनिधि : ज्येष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से अत्यंत दुख हुआ। नाना के निधन से केवल एक संवेदनशील और प्रतिभाशाली कलाकार ही नहीं, बल्कि मिट्टी, खेती और किसानों से दिल से जुड़ा एक आत्मीय इंसान भी हमसे दूर चला गया है। इन शब्दों में जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड के अध्यक्ष अशोक जैन ने नाना पाटेकर के निधन पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

नाना पाटेकर और जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड के जैन हिल्स के बीच रहे आत्मीय संबंधों की यादें साझा करते हुए अशोक जैन ने बताया कि नाना पाटेकर ने वर्ष 2005 और 2015 में जैन हिल्स का सदिच्छा दौरा किया था। विशेष रूप से 16 अक्टूबर 2015 को मकरंद अनासपुरे और नाना पाटेकर की ‘नाम’ संस्था के माध्यम से किसानों के लिए जैन हिल्स में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नाना पाटेकर और श्रद्धेय बड़ेभाऊ भवरलालजी जैन की मुलाकात हुई थी।

इस मुलाकात के दौरान खेती, मिट्टी और पानी जैसे विषयों पर दोनों के बीच बेहद आत्मीयता से विस्तृत चर्चा हुई। यह महज औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि मिट्टी से प्रेम करने वाले दो संवेदनशील व्यक्तित्वों के बीच हुआ दिल से दिल का संवाद था।

नाना पाटेकर ने जैन हिल्स स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र का भी उत्सुकता से दौरा किया था। उन्होंने वहां किए जा रहे विभिन्न कृषि प्रयोगों की जानकारी रुचि के साथ ली। जैन इरिगेशन द्वारा विकसित आम के पौधों में भी उन्होंने विशेष रुचि दिखाई और अपने फार्म हाउस के लिए श्रद्धेय बड़ेभाऊ से आम के पौधे उपलब्ध कराने का आग्रह किया था।

इसके बाद आम, अमरूद, सीताफल और नारियल के पौधे उनके फार्म हाउस पर भेजे गए। नाना ने इन पौधों को केवल लगाया ही नहीं, बल्कि उन्हें बेहद लगाव और प्रेम से संवारा। इसी के साथ नाना पाटेकर, श्रद्धेय बड़ेभाऊ, जैन परिवार और जैन हिल्स के बीच स्नेह का रिश्ता खेती, मिट्टी, पानी और इंसानियत से और भी गहरा होता गया।

नाना पाटेकर आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जैन हिल्स की मिट्टी से जुड़े उनके रिश्ते और उनकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी। खेती और किसानों के प्रति उनका लगाव तथा संवेदनशील व्यक्तित्व सदैव स्मरण में रहेगा। नाना पाटेकर की स्मृतियों को विनम्र श्रद्धांजलि, ऐसी भावनाएं अशोक जैन ने व्यक्त कीं।

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