त्योहारों के बीच अंधेरे में जलगांव! बंद स्ट्रीट लाइटों से नागरिक परेशान

नवरात्रि का उत्साह चरम पर, दिवाली भी करीब; महापौर-नगरसेवकों की शिकायतों के बावजूद समस्या बरकरार

जलगांव, प्रतिनिधि : शहर में इस समय त्योहारों का माहौल है और नवरात्रि उत्सव का उत्साह चरम पर पहुंच चुका है। कुछ ही दिनों में रोशनी का पर्व दिवाली भी दस्तक देने वाला है। लेकिन त्योहारों की इस रौनक के बीच जलगांव शहर के कई इलाके अंधेरे में डूबे हुए हैं। शहर के प्रमुख मार्गों और कई चौराहों पर स्ट्रीट लाइटें बंद होने से नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

अनेक इलाकों में अंधेरा, मरम्मत की ओर अनदेखी

शहर के कई प्रमुख तथा आंतरिक मार्गों पर स्ट्रीट लाइटें पूरी तरह बंद हैं। कई जगह बिजली के पोल तो खड़े हैं, लेकिन उन पर लाइटें नहीं हैं। वहीं कुछ स्थानों पर लगी लाइटें तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी हैं। रात के समय सड़कों पर घना अंधेरा रहने से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नागरिकों का कहना है कि अंधेरे का फायदा उठाकर चोरी और महिलाओं से छेड़छाड़ जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में त्योहारों के दौरान शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

महापौर-उपमहापौर और नगरसेवकों के पत्रों की भी अनदेखी?

शहर में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों की समस्या को लेकर महापौर, उपमहापौर और विभिन्न प्रभागों के नगरसेवकों ने कई बार महानगरपालिका प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। त्योहारों को देखते हुए खराब स्ट्रीट लाइटों की तत्काल मरम्मत करने की मांग भी जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार की गई है।

हालांकि, नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते त्योहारों के मौसम में भी शहरवासियों को अंधेरे में आवाजाही करनी पड़ रही है।

गरबा-दांडिया के बाद दिवाली, प्रशासन कब जागेगा?

नवरात्रि के दौरान गरबा और दांडिया कार्यक्रमों के चलते नागरिक, विशेषकर महिलाएं, रात देर तक घरों से बाहर रहती हैं। इसके बाद रोशनी का पर्व दिवाली भी आने वाला है। ऐसे में शहर की सड़कों और चौराहों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होना जरूरी है।

अब सवाल यह है कि क्या जलगांव महानगरपालिका प्रशासन त्योहारों के बीच बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करेगा? या फिर जलगांववासियों को अभी और कुछ समय तक अंधेरे में ही आवाजाही करनी पड़ेगी?

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