काव्यरत्नावली चौक में साकार हुआ ‘छत्रपति का प्रशासन’

जलगांववासियों के आकर्षण का केंद्र बना भव्य सजावटी प्रदर्शन; छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से किया गया प्रस्तुत

जलगांव,  (प्रतिनिधि) : भंवरलाल एंड कांताबाई जैन फाउंडेशन तथा युवाशक्ति फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में काव्यरत्नावली चौक में छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रशासन और कार्यसंस्कृति की झलक प्रस्तुत करने वाली आकर्षक सजावट साकार की गई है। इस उपक्रम में मर्दानी खेलों ने भी रंग भर दिया। आकर्षक सजावट के कारण यह प्रदर्शन जलगांववासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

जैन इरिगेशन के अध्यक्ष अशोक जैन की संकल्पना से जैन इरिगेशन के कला विभाग ने यह सजावट तैयार की है। ‘छत्रपति का प्रशासन, कार्यसंस्कृति का बीजारोपण’ इस संकल्पना पर आधारित प्रदर्शन में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था, लोककल्याणकारी नीतियों और स्वराज्य की संकल्पना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

काव्यरत्नावली चौक स्थित श्री गणेश की आरती जैन इरिगेशन के अध्यक्ष अशोक जैन, श्रीमती ज्योति जैन, डॉ. जयवंत नागूलकर, डॉ. कल्याणी नागूलकर, क्रेडाई के राज्य उपाध्यक्ष अनिश शाह, यामिनी शाह तथा स्वरूप लूकंड की प्रमुख उपस्थिति में की गई। इस अवसर पर मंडल के सभी सदस्य उपस्थित थे।

अष्टप्रधान मंडल, जल प्रबंधन और प्रजा कल्याण पर विशेष जोर

प्रदर्शन में छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रशासन में अष्टप्रधान मंडल की भूमिका की जानकारी प्रस्तुत की गई है। पेशवा, अमात्य, वाकनवीस, दबीर, सचिव, पंडितराव, सर-ए-नौबत और न्यायाधीश इन आठ प्रमुख पदों के माध्यम से प्रशासन के विभिन्न विभागों का संचालन किया जाता था। छत्रपति शिवाजी महाराज का प्रशासन प्रजा के कल्याण को केंद्र में रखने वाला था, इस विचार को भी प्रदर्शन के माध्यम से रेखांकित किया गया है।

वतनदारी व्यवस्था पर नियंत्रण, सरदारों और जागीरदारों की निजी सेनाओं के स्थान पर राज्य के नियंत्रण में सैन्य व्यवस्था तैयार करना तथा किसानों को खेती के लिए बैलों की जोड़ी और आवश्यक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए ‘तगाई’ पद्धति से ऋण उपलब्ध कराना जैसी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी भी यहां दी गई है। ‘रयतेच्या भाजीच्या देठालाही हात लावू नये’ अर्थात प्रजा की संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने का प्रशासनिक अनुशासन और संदेश भी इस प्रदर्शन के माध्यम से प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया है।

जल प्रबंधन के लिए तालाब और बांधों का निर्माण, सड़कों एवं बुनियादी सुविधाओं का विकास, व्यापार-वाणिज्य को प्रोत्साहन, किलों की सुरक्षा व्यवस्था, कला एवं साहित्य को संरक्षण, राजनयिक संबंध, महिला सशक्तीकरण तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे प्रशासन के अनेक पहलुओं की जानकारी भी यहां प्रस्तुत की गई है।

स्वदेशी विचार और स्वराज्य की संकल्पना पर भी विशेष जोर दिया गया है। लोकाभिमुख प्रशासन की आदर्श पद्धति के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा उनके कार्य करने की पद्धति से परिचित कराने के उद्देश्य से यह सजावट तैयार की गई है।

आयोजकों की ओर से जलगांववासियों से काव्यरत्नावली चौक स्थित इस प्रदर्शन को देखने और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशासनिक व्यवस्था एवं कार्यसंस्कृति को समझने का आह्वान किया गया है।

Don`t copy text!